
शारदीय नवरात्रि का 15 अक्टूबर यानी आज से शुंभारंभ हो गया है. नवरात्रि में पहले दिन माँ देवी शैलपुत्री स्वरूप की उपासना की जाती है . पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है और कहा गया है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजन्म में शैलपुत्री का नाम सती था और ये भगवान शिव की पत्नी थी, सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिए थे तब सती ने अपने को यज्ञ कुंड अग्नि में भस्म कर ली फिर अगले जन्म में यही सती शैलपुत्री स्वरूप में प्रकट हुईं और भगवान शिव से फिर विवाह हुआ। कहाँ जाता गई जो भी मन लगा के 9 दिन माता की भक्ति करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है माँ कभी अपने भक्तों को निराश नही करती एक माँ ही है जो अपने बच्चे को कभी दुःखी नही देखना चाहती है ।
आइये जानते है मां शैलपुत्री का पूजन करने की सही विधि
मां शैलपुत्री के विग्रह या चित्र को लकड़ी के पटरे पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करें. मां शैलपुत्री को सफेद वस्तु अति प्रिय है, इसलिए मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पण करें और सफेद बर्फी का भोग लगाएं. एक साबुत पान के पत्ते पर 27 फूलदार लौंग रखें. मां शैलपुत्री के सामने घी का दीपक जलाएं और एक सफेद आसन पर उत्तर दिशा में मुंह करके बैठें इससे आप की हर समस्या का अंत होगा बस दुआ अछे कार्य के लिए हो