भरत का त्याग और प्रेम अतुलनीय”- डॉ. ज्ञानवती अवस्थी

कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल द्वारा गत दिवस आशीर्वाद भवन प्रांगण में एक दिवसीय श्रीरामचरित मानस की कथा का आयोजन किया गया जिसकी मुख्य वक्ता मानस मर्मज्ञ डॉ. ज्ञानवती अवस्थी थीं | कथा के पूर्व श्री संजय अवस्थी उपाध्यक्ष ने उनका परिचय देते हुए बताया कि डॉ. ज्ञानवती जी ने मानस के प्रसंगों का गहराई से मंथन किया है और जब वे कथा कहती हैं तो आमजन भाव-विभोर हो जाते है , कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री राम जी की पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण कर किया गया तथा अतिथि वक्ता का स्वागत समाज के वरिष्ठ एवं पूर्व अध्यक्ष श्री वीरेंद्र पांडे जी, श्री तिवारी जी, श्री शिव  कुमार तिवारी जी के साथ वरिष्ठ जनों ने किया | अपने प्रवचन में डॉ. ज्ञानवती जी ने कहा कि, भरत का चरित्र भगवान राम के प्रति उनके अटूट प्रेम, भक्ति और त्याग का अद्वितीय उदाहरण है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में भरत को एक ऐसे आदर्श भाई के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसने राजपद को ठुकराकर धर्म, नीति और मर्यादा की स्थापना की। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि रिश्ते और कर्तव्य किसी भी सांसारिक सुख से बढ़कर होते हैं।
    अगम सनेह भरत रघुवर को ।
             जह न जाई मन विधि हरि हर को ।।

  भरत जी की कहानी तब शुरू होती है जब उनकी माता कैकेयी, मंथरा के बहकावे में आकर, महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राज्याभिषेक का वरदान मांगती हैं। यह सुनकर भरत को गहरा आघात लगता है। अयोध्या लौटने पर जब उन्हें इस षड्यंत्र का पता चलता है, तो वे अपनी माता पर क्रोधित होते हैं और इस पाप का प्रायश्चित करने का निश्चय करते हैं। भरत का सबसे बड़ा गुण उनका त्याग है। वह राज्य को अपनी माँ के पाप का फल मानते हैं और इसे स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं। उनका मानना है कि सिंहासन पर उनका कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि वे राम के वनवास का कारण बने हैं। भरत के लिए राम ही उनके पूज्य देवता और आदर्श हैं। वे राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट जाते हैं, जहाँ वे अपने भाई को राजपाट संभालने के लिए मनाने का प्रयास करते हैं। जब राम अपने वचन से पीछे हटने से इनकार कर देते हैं, तो भरत उनकी चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौट आते हैं। वे इन पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर देते हैं और स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी का जीवन बिताते हैं। इस दौरान वे चौदह वर्ष तक राम के लौटने की प्रतीक्षा करते हैं, और स्वयं को राजसी भोग-विलास से दूर रखते हैं।
  इस प्रकार, भरत का चरित्र प्रेम, भक्ति, और कर्तव्य परायणता का अद्भुत संगम है। वे हमें यह सिखाते हैं कि सच्चा सम्मान और गौरव पद से नहीं, बल्कि धर्म और त्याग से मिलता है। उनका त्याग इतना महान था कि वे भगवान के प्रिय पात्रों में से एक बन गए।

  कथा के पश्चात उनका अभिनंदन समाज के सचिव श्री राजेश दीक्षित, उपाध्यक्ष श्री संजय अवस्थी, सहसचिव श्री प्रमोद मिश्रा व श्री अनुराग पांडेय इनके साथ ही समाज के वरिष्ठ श्री वीरेंद्र पाण्डेय, श्री शिव कुमार तिवारी जी शाल और श्रीफल देकर उनका अभिनंदन किया |

  आभार प्रदर्शन करते हुए सचिव श्री राजेश दीक्षित ने कहा कि आज से दस वर्ष पहले भी डॉ. ज्ञानवती जी का प्रवचन भवन प्रांगण में हुआ था तब उनके द्वारा दिए गए मंत्र और स्तुति को मैंने अपनी प्रार्थना में शामिल कर लिया है और आज भी मैं नियमित उसका पठन करता हूँ | आज उनकी उपस्थिति से हमारा समाज अत्यंत गौरवान्वित है । हमारा समाज आगे भी इस तरह के धार्मिक, बौद्धिक विमर्श का आयोजन करता रहेगा, ताकि समाज में प्रेम विश्वास और समरसता बढ़े। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री अजय अवस्थी ‘किरण’ जी ने किया|
 
आज के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री गिरिजा शंकर दीक्षित, श्री प्रकाश अवस्थी, श्री श्रीकांत अवस्थी, श्री चन्द्र भूषण बाजपेई, श्री राज कुमार अवस्थी, राज कुमार शुक्ला, श्री अशोक दीक्षित, श्री रमाशंकर पाण्डेय, संजय अवस्थी, डॉ. विवेक अवस्थी, श्री रविन्द्र मिश्रा कार्यकारिणी सदस्य श्री विकास तिवारी, श्री आशीष बाजपेई,  श्री लखन लाल बाजपेई, श्री अजय बाजपेई, श्री प्रभात पाण्डेय, श्री आशुतोष दिवेदी, श्री पंकज तिवारी, श्रीमती आभा बाजपेई, श्रीमती निशा पांडे, श्रीमती संध्या मिश्रा, श्रीमती निशा अवस्थी, श्रीमती शीतल मिश्रा, श्रीमती विभा बाजपेई,  श्री श्याम बाजपेई, श्री सुमन पांडे कान्यकुब्ज महिला मंडल की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती शशि शुक्ला, श्रीमती पूर्णिमा शुक्ला, श्रीमती शिखा दुबे, श्रीमती रीता पाण्डेय, श्रीमती निशा अवस्थी, श्रीमती प्रेमलता त्रिवेदी, श्रीमती उन्नति शुक्ला, श्रीमती रचना अवस्थी, श्रीमती श्री आलोक तिवारी, श्री शिव नारायण तिवारी, श्री मुकुंद चतुर्वेदी, डॉ. देवेन्द्र पाठक, डॉ. स्नेहलता पाठक, श्री राकेश दुबे, श्रीमती मंजू दुबे, श्री सत्यदेव तिवारी,  श्री राजेश त्रिवेदी, श्री सुनील दीक्षित दुर्गेश अग्निहोत्री सहित बड़ी संख्या में विप्र बंधु उपस्थित रहें |

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