- प्रभु दर्शन भवन में रविवार विशेष परमात्म महावाक्य
- विश्व कल्याण का भाव जागृत करने स्वयं को सृष्टि रूपी विश्व वृक्ष का पूर्वज समझें…
बिलासपुर। टिकरापारा स्थित प्रभु दर्शन भवन में आयोजित रविवार विशेष अव्यक्त महावाक्य क्लास में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में आत्मिक सुख और शांति का आधार सरल स्वभाव, सहनशीलता तथा पर-उपकार की भावना है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति व्यर्थ बातों पर तुरंत फुलस्टॉप लगाना सीख लेता है, स्वयं को विश्व मंच का खिलाड़ी समझता है और सभी के प्रति शुभभावना रखता है, वह सहज रूप से माया पर विजय प्राप्त कर लेता है तथा सदैव हर्षित रहता है। माया कुछ और नहीं है बल्कि वे नकारात्मक बातें हैं जो हमें अच्छे कर्म करने से रोकती हैं।
मंजू दीदी ने आगे कहा कि हम सभी आत्माएं सृष्टि रूपी विश्व-वृक्ष के पूर्वज हैं। जिस प्रकार वृक्ष की जड़ें पूरे वृक्ष का पालन-पोषण करती हैं, उसी प्रकार श्रेष्ठ आत्माओं का कर्तव्य है कि वे अपने शुभ संकल्पों और सकारात्मक वाइब्रेशन्स द्वारा विश्व की आत्माओं को सुख, शांति और शक्ति का अनुभव कराएं। आज विश्व अशांति और तनाव से मुक्ति की तलाश में है, ऐसे समय में पर-उपकार की भावना ही सच्ची सेवा है।
उन्होंने कहा कि स्वभाव की सरलता एक ऐसा आध्यात्मिक कवच है जो व्यक्ति को माया के आकर्षण से सुरक्षित रखता है। सरल और सहनशील व्यक्ति पुरानी बातों को पकड़कर नहीं बैठता, बल्कि सेकंड में फुलस्टॉप लगाकर आगे बढ़ जाता है। इससे मन व्यर्थ संकल्पों से मुक्त रहता है और चेहरा सदैव प्रसन्न बना रहता है।
मंजू दीदी ने बताया कि स्वयं को विश्व नाटक का खिलाड़ी समझकर साक्षी भाव से परिस्थितियों को देखने पर बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी प्रतीत होने लगती है। सरलता, निरहंकारिता और निस्वार्थता व्यक्ति को सहज योगी बनाती हैं तथा परमात्मा की याद को भी सहज अनुभव कराती हैं।
उन्होंने सभी को प्रतिदिन अपने दिनभर के कर्मों का पोतामेल निकालने तथा मन को हल्का रखने की प्रेरणा दी।