चेम्बर के संविधान में असंतुलन से नाराज कमल सोनी का बड़ा ऐलान `बिलासपुर संभाग अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कहा- “रायपुर केंद्रित व्यवस्था नहीं चलेगी, संघर्ष जारी रहेगा”

बिलासपुर। संवाददाता
छत्तीसगढ़ के व्यापारी संगठन में भूचाल। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बिलासपुर संभाग के कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य श्री कमल सोनी ने संविधान में व्याप्त असंतुलन और क्षेत्रीय उपेक्षा के विरोध में शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

08 अगस्त को राज्य अध्यक्ष सतीश थौरानी को भेजे त्यागपत्र में श्री सोनी ने चेम्बर पर रायपुर केंद्रित राजनीति करने का सीधा आरोप लगाया।

"डेढ़ साल तक सिर्फ आश्वासन मिला"
श्री सोनी ने कहा कि वे चेम्बर में संविधान की धारा 9(1) और धारा 15 में संशोधन कराकर समान प्रतिनिधित्व और संतुलित नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से आए थे। लेकिन डेढ़ वर्ष में दर्जनों पत्र, बैठक और निवेदन के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा 09 अगस्त को बिलासपुर में होने वाली बैठक के एजेंडे से संविधान संशोधन का मुद्दा ही गायब कर दिया गया। यह बिलासपुर के 50 हजार व्यापारियों के साथ धोखा है।

धारा 15 को बताया "भेदभाव की जड़"
सबसे बड़ा हमला संविधान की धारा 15 पर। श्री सोनी ने कहा कि इस धारा के कारण चेम्बर के अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर केवल रायपुर-नया रायपुर के लोग ही बैठ सकते हैं।

जब चेम्बर पूरे छत्तीसगढ़ का है, तो ताज भी सिर्फ एक शहर के सिर पर क्यों? बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, सरगुजा के व्यापारियों को क्या सिर्फ ताली बजाने के लिए रखा गया है? – श्री सोनी ने सवाल उठाया।

बिलासपुर की अनदेखी पर भड़के
इस्तीफे के साथ उन्होंने बिलासपुर की उपेक्षा का मुद्दा भी गरमा दिया।
श्री सोनी ने 2 बड़ी मांगें सरकार और चेम्बर के सामने रखीं:

  1. बिलासपुर को तुरंत State Capital Region में शामिल किया जाए
  2. बिलासपुर में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क बनाया जाए

उन्होंने कहा बिजली, कोयला, रेल, हाईकोर्ट सब बिलासपुर में है, फिर भी पिछले 10 साल में यहां के उद्योग उजड़कर रायपुर चले गए। अगर अब भी आंखें नहीं खुलीं तो बिलासपुर व्यापार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

पद गया, हौसला नहीं
इस्तीफा देते हुए श्री सोनी ने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अब और तेज होगी।

मैंने कुर्सी छोड़ी है, जिम्मेदारी नहीं। जब तक प्रदेश के हर संभाग को बराबर का सम्मान और नेतृत्व नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

उनके इस फैसले के बाद प्रदेश भर के व्यापारियों में चर्चा तेज हो गई है।

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