सकारात्मक चिंतन से जीवन में आती है नई दिशा : बीके संतोषी दीदीकेंद्रीय जेल में कैदियों को बताया सकारात्मक चिंतन एवं गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक रहस्य

22 सितंबर 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन के तत्वावधान में केंद्रीय जेल बिलासपुर में सकारात्मक चिंतन विषय पर विशेष आध्यात्मिक कक्षा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी ने बंदियों को जीवन में सकारात्मक सोच, आत्मबल और श्रेष्ठ संकल्पों की शक्ति के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही गणेश चतुर्थी पर्व के आध्यात्मिक रहस्य को समझाते हुए जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश दिया गया।
बीके संतोषी दीदी ने कहा कि मनुष्य का जीवन परिस्थितियों से नहीं, बल्कि परिस्थितियों के प्रति उसके दृष्टिकोण से प्रभावित होता है। परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुसार नहीं होतीं, लेकिन उनके प्रति हमारी सोच और प्रतिक्रिया हमारे हाथ में होती है। यदि हम हर परिस्थिति में सकारात्मक चिंतन करना सीख लें तो कठिन से कठिन समय भी आत्मशक्ति और परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचार मनुष्य की ऊर्जा को कमजोर करते हैं, जबकि सकारात्मक विचार मन में उमंग, उत्साह और आत्मविश्वास पैदा करते हैं। जब व्यक्ति अपने मन को श्रेष्ठ विचारों से भरता है तो उसके व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है। उन्होंने बंदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बीता हुआ समय चाहे जैसा रहा हो, लेकिन वर्तमान क्षण से अपने जीवन को नई दिशा देना हर व्यक्ति के हाथ में है।
बीके संतोषी दीदी ने कहा कि जेल की दीवारें किसी व्यक्ति के भविष्य को निर्धारित नहीं करतीं। सच्चा परिवर्तन मन से प्रारंभ होता है। यदि व्यक्ति अपने भीतर यह संकल्प पैदा कर ले कि मुझे स्वयं को श्रेष्ठ बनाना है, अपने परिवार और समाज के लिए उपयोगी बनना है, तो वह अपने जीवन में एक नई शुरुआत कर सकता है। उन्होंने आत्मचिंतन के माध्यम से स्वयं की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें सकारात्मक शक्तियों में बदलने की प्रेरणा दी।

गणेश चतुर्थी के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से गणेश का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन के वास्तविक विघ्न बाहर से अधिक हमारे भीतर के विकार, कमजोरियां, नकारात्मक विचार और पुरानी आदतें हैं। जब मनुष्य अपने अंदर की इन बाधाओं को पहचानकर दूर करता है, तब जीवन में सहजता और सफलता का मार्ग खुलता है।
उन्होंने गणेश जी के बड़े मस्तक को विशाल और सकारात्मक सोच का प्रतीक बताते हुए कहा कि हमें छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण रखना चाहिए। बड़े कान हमें अधिक सुनने और कम बोलने की प्रेरणा देते हैं, जबकि छोटी आंखें एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि का संदेश देती हैं। गणेश जी का वाहन मूषक इच्छाओं और चंचल मन का प्रतीक माना जा सकता है। इसका संदेश है कि मनुष्य को अपनी इच्छाओं और मन पर नियंत्रण रखते हुए विवेकपूर्ण जीवन जीना चाहिए।
बीके संतोषी दीदी ने कहा कि गणेश चतुर्थी केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर के विघ्नों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का संकल्प लेने का अवसर है। हमें इस दिन यह संकल्प लेना चाहिए कि क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, नफरत, व्यसन और नकारात्मक सोच जैसे आंतरिक विघ्नों पर विजय प्राप्त करेंगे।
उन्होंने बंदियों को राजयोग के माध्यम से मन को शांत और शक्तिशाली बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि कुछ समय प्रतिदिन स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा को याद करने से मन की अशांति कम होती है और आत्मबल बढ़ता है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप और परमात्मा के साथ अपने संबंध को अनुभव करता है तो उसके अंदर आशा, शांति और परिवर्तन की शक्ति जागृत होती है।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों ने सकारात्मक चिंतन एवं आध्यात्मिक रहस्यों को रुचिपूर्वक सुना तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में आत्मविश्वास, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का विकास करना था।

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